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वाल्मीकि रामायण 57.36

निषसाद च हस्तेन गृहीत्वा वालिनः सुतम् ।
रमणीये वनोद्देशे महेन्द्रस्य गिरेस्तदा ।। 5.57.36 ।।।।

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