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वाल्मीकि रामायण 57.34

हनुमांस्तु गुरून् वृद्धान् जाम्बवत्प्रमुखांस्तदा ।
कुमारमङ्गदं चैव सो ऽवन्दत महाकपिः ।। 5.57.34 ।।।।

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