ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5757.3वाल्मीकि रामायण 57.3वातसङ्घातजातोर्मिचन्द्रांशुशिशिराम्बुमत् । भुजङ्गयक्षगन्धर्वप्रबुद्धकमलोत्पलम् ।। 5.57.3 ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय