ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5656.34वाल्मीकि रामायण 56.34स लिलङ्घयिषुर्भीमं सलीलं लवणार्णवम् । कल्लोलास्फालवेलान्तमुत्पपात नभो हरिः ।। 5.56.34 ।।पिछलापूरा अध्याय