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वाल्मीकि रामायण 56.27

तस्योरुवेगोन्मथिताः पादपाः पुष्पशालिनः ।
निपेतुर्भूतले रुग्णाः शक्रायुधहता इव ।। 5.56.27 ।।।।

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