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वाल्मीकि रामायण 56.13

देवदारुभिरत्युच्चैरूर्ध्वबाहुमिव स्थितम् ।
प्रपातजलनिर्घोषैः प्राक्रृष्टमिव सर्वतः ।। 5.56.13 ।।।।

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