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वाल्मीकि रामायण 56.11

बोध्यमानमिव प्रीत्या दिवाकरकरैः शुभैः ।
उन्मिषन्तमिवोद्धूतैर्लोचनैरिव धातुभिः ।। 5.56.11 ।।।।

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