ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5555.4वाल्मीकि रामायण 55.4धन्यास्ते पुरुषश्रेष्ठा ये बुद्ध्या कोपमुत्थितम् । निरुन्धन्ति महात्मानो दीप्तमग्निमिवाम्भसा ।। 5.55.4 ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय