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वाल्मीकि रामायण 55.34

स निमित्तैश्च दृष्टार्थैः कारणैश्च महागुणैः ।
ऋषिवाक्यैश्च हनुमानभवत् प्रीतभानसः ।। 5.55.34 ।।।।

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