ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5555.27वाल्मीकि रामायण 55.27यद्वा दहनकर्मा ऽयं सर्वत्र प्रभुरव्ययः । न मे दहति लाङ्गूलं कथमार्यां प्रधक्ष्यति ।। 5.55.27 ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय