ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5555.10वाल्मीकि रामायण 55.10यदर्थमयमारम्भस्तत्कार्यमवसादितम् । मया हि दहता लङ्कां न सीता परिरक्षिता ।। 5.55.10 ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय