वाल्मीकि रामायण 54.40
ततस्तु लङ्का सहसा प्रदग्धा सराक्षसा साश्वरथा सनागा ।
सपक्षिसङ्घा समृगा सवृक्षा रुरोद दीना तुमुलं सशब्दम् ।। 5.54.40 ।।।।
ततस्तु लङ्का सहसा प्रदग्धा सराक्षसा साश्वरथा सनागा ।
सपक्षिसङ्घा समृगा सवृक्षा रुरोद दीना तुमुलं सशब्दम् ।। 5.54.40 ।।।।