ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5454.16वाल्मीकि रामायण 54.16वर्जयित्वा महातेजा विभीषणगृहं प्रति । क्रममाणः क्रमेणैव ददाह हरिपुङ्गवः ।। 5.54.16 ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय