ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5353.30वाल्मीकि रामायण 53.30यदि मां वृत्तसम्पन्नां तत्समागमलालसाम् । स विजानाति धर्मात्मा शीतो भव हनूमतः ।। 5.53.30।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय