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वाल्मीकि रामायण 53.27

मङ्गलाभिमुखी तस्य सा तदा ऽ ऽसीन्महाकपेः ।
उपतस्थे विशालाक्षी प्रयता हव्यवाहनम् ।। 5.53.27।।।।

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