ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5252.9वाल्मीकि रामायण 52.9तस्मात् प्रसीद शत्रुघ्न राक्षसेन्द्र दुरासद । युक्तायुक्तं विनिश्चित्य दूतदण्डे विधीयताम् ।। ५.५२.९।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय