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वाल्मीकि रामायण 51.32

रामेण हि प्रतिज्ञातं हर्यृक्षगणसन्निधौ ।
उत्सादनममित्राणां सीता यैस्तु प्रधर्षिता ।। ५.५१.३२।।।।

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