Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 51.28

न तु धर्मोपसंहारमधर्मफलसंहितम् ।
तदेव फलमन्वेति धर्मश्चाधर्मनाशनः ।। ५.५१.२८।।।।

पूरा अध्याय