ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5151.21वाल्मीकि रामायण 51.21तत्त्रिकालहितं वाक्यं धर्म्यमर्थानुबन्धि च । मन्यस्व नरदेवाय जानकी प्रतिदीयताम् ।। ५.५१.२१।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय