Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 51.2

अहं सुग्रीवसन्देशादिह प्राप्तस्तवालयम् ।
राक्षसेन्द्र हरीशस्त्वां भ्राता कुशलमब्रवीत् ।। ५.५१.२।।।।

पूरा अध्याय