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वाल्मीकि रामायण 50.8

यदि तावत्त्वमिन्द्रेण प्रेषितो रावणालयम् ।
तत्त्वमाख्याहि मा भूत्ते भयं वानर मोक्ष्यसे ।। ५.५०.८।।।।

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