ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5050.4वाल्मीकि रामायण 50.4स राजा रोषताम्राक्षः प्रहस्तं मन्त्रिसत्तमम् । कालयुक्तमुवाजेदं वचो विपुलमर्थवत् ।। ५.५०.४।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय