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वाल्मीकि रामायण 49.15

स तैः संपीड्यमानो ऽपि रक्षोभिर्भीमविक्रमैः ।
विस्मयं परमं गत्वा रक्षोधिपमवैक्षत ।। ५.४९.१५।।।।

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