ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 4848.55वाल्मीकि रामायण 48.55तं मत्तमिव मातङ्गं बद्धं कपिवरोत्तमम् । राक्षसा राक्षसेन्द्राय रावणाय न्यवेदयन् ।। ५.४८.५५।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय