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वाल्मीकि रामायण 48.50

अथेन्द्रजित्तुद्रुमचीरबद्धं विचार्य वीरः कपिसत्तमं तम् ।
विमुक्तमस्त्रेण जगाम चिन्तां नान्येन बद्धो ह्यनुवर्तते ऽस्त्रम् ।। ५.४८.५०।।।।

पूरा अध्याय