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वाल्मीकि रामायण 48.38

अवध्यो ऽयमिति ज्ञात्वा तमस्त्रेणास्त्रतत्त्ववित् ।
निजग्राह महाबाहुर्मारुतात्मजमिन्द्रजित् ।। ५.४८.३८।।।।

पूरा अध्याय