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वाल्मीकि रामायण 48.26

इन्द्रजित्तु रथं दिव्यमास्थितश्चित्रकार्मुकः ।
धनुर्विस्फारयामास तडिदूर्जितनिःस्वनम् ।। ५.४८.२६।।।।

पूरा अध्याय