Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 48.18

श्रीमान् पद्मपलाशाक्षो राक्षसाधिपतेः सुतः ।
निर्जगाम महातेजाः समुद्र इव पर्वसु ।। ५.४८.१८।।।।

पूरा अध्याय