ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 4848.15वाल्मीकि रामायण 48.15नानाशस्त्रैश्च संग्रामे वैशारद्यमरिन्दम् । अवश्यमेव बोद्धव्यं काम्यश्च विजयो रणे ।। ५.४८.१५।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय