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वाल्मीकि रामायण 47.36

स भग्नबाहूरुकटीशिरोधरः क्षसन्नसृङ्निर्मथितास्थिलोचनः ।
स भग्रसन्धिः प्रविकीर्णबन्धनो हतः क्षितौ वायुसुतेन राक्षसः ।महाकपिर्भूमितले निपीड्य तं चकार रक्षोधिपतेर्महद्भयम् ।। ५.४७.३६।।।।

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