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वाल्मीकि रामायण 47.21

स तेन बाणैः प्रसभं निपातितैश्कार नादं घननादनिस्वनः ।
समुत्पपाताशु नभः स मारुतिर्भुजोरुविक्षेपणघोरदर्शनः ।। ५.४७.२१।।।।

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