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वाल्मीकि रामायण 47.17

स मन्दराग्रस्थ इवांशुमालिको विवृद्धकोपो बलवीर्यसंयुतः ।
कुमारमक्षं सबलं सवाहनं ददाह नेत्राग्निमरीचिभिस्तदा ।। ५.४७.१७।।।।

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