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वाल्मीकि रामायण 47.14

ततः स वीरः सुमुखात् पतत्त्रिणः सुवर्णपुङ्खान् सविषानिवोरगान् ।
समाधिसंयोगविमोक्षतत्त्वविच्छरानथ त्रीन् कपिमूर्ध्न्यपातयत् ।। ५.४७.१४।।।।

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