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वाल्मीकि रामायण 46.38

हतैर्नागैश्च तुरगैर्भग्नाक्षैश्च महारथैः ।
हतैश्च राक्षसैर्भूमी रुद्धमार्गा समन्ततः ।। ५.४६.३८।।।।

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