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वाल्मीकि रामायण 46.33

पट्टिशेन शिताग्रेण प्रघसः प्रत्ययोधयत् ।
भासकर्णश्च शूलेन राक्षसः कपिसत्तमम् ।। ५.४६.३३।।।।

पूरा अध्याय