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वाल्मीकि रामायण 46.24

अर्द्यमानस्ततस्तेन दुर्धरेणानिलात्मजः ।
चकार कदनं भूयो व्यवर्धत च वेगवान् ।। ५.४६.२४।।।।

पूरा अध्याय