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वाल्मीकि रामायण 45.10

स तैः क्रीडन् धनुष्मद्भिर्व्योम्नि वीरः प्रकाशते ।
धनुष्मद्भिर्यथा मेघैर्मारुतः प्रभुरम्बरे ।। ५.४५.१०।।।।

पूरा अध्याय