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वाल्मीकि रामायण 44.3

धनुः शक्रधनुः प्रख्यं महद्रुचिरसायकम् ।
विस्फारयानो वेगेन वज्राशनिसमस्वनम् ।। ५.४४.३।।।।

पूरा अध्याय