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वाल्मीकि रामायण 44.18

स हतस्तरसा तेन जम्बुमाली महाबलः ।
पपात निहतो भूमौ चूर्णिताङ्गविभूषणः ।। ५.४४.१८।।।।

पूरा अध्याय