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वाल्मीकि रामायण 41.2

अल्पशेषमिदं कार्यं दृष्टेयमसितेक्षणा ।
त्रीनुपायानतिक्रम्य चतुर्थ इह दृश्यते ।। ५.४१.२।।।।

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