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वाल्मीकि रामायण 4.26

त्रिविष्टप निभम् दिव्यम् दिव्य नाद विनादितम् ।
वाजि हेषित सम्घुष्टम् नादितम् भूषणैः तथा ॥५-४-२६॥

पूरा अध्याय