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वाल्मीकि रामायण 4.20

ध्वजीन् पताकिनश्चैव ददर्श विविधायुधान् ।
शक्ति वृक्ष आयुधामः चैव पट्टिश अशनि धारिणः ॥५-४-२०॥

पूरा अध्याय