ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 44.10वाल्मीकि रामायण 4.10शुश्राव मधुरम् गीतम् त्रि स्थान स्वर भूषितम् । स्त्रीणाम् मद समृद्धानाम् दिवि च अप्सरसाम् इव ॥५-४-१०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय