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वाल्मीकि रामायण 4.10

शुश्राव मधुरम् गीतम् त्रि स्थान स्वर भूषितम् ।
स्त्रीणाम् मद समृद्धानाम् दिवि च अप्सरसाम् इव ॥५-४-१०॥

पूरा अध्याय