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वाल्मीकि रामायण 4.1

स निर्जत्य पुरीम् लण्का श्रेष्ठाम् ताम् कामरूपिणीम् ।
विक्रमेण महातेजा हनुमान् कपिसत्तमः ॥५-४-१॥

पूरा अध्याय