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वाल्मीकि रामायण 39.6

ज्ञत्वा संप्रस्थितं देवी वानरं मारुतात्मजम् ।
बाष्पगद्गदया वाचा मैथिली वाक्यमब्रवीत् ।। ५.३९.६।।।।

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