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वाल्मीकि रामायण 39.12

मत्सन्देशयुता वाचस्त्वत्तः श्रुत्वैव राघवः ।
पराक्रमविधिं वीरो विधिवत् संविधास्यति ।। ५.३९.१२।।।।

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