ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 3838.5वाल्मीकि रामायण 38.5एतत्ते देवि सदृशं पत्न्यास्तस्य महात्मनः । का ह्यन्या त्वामृते देवि ब्रूयाद्वचनमीदृशम् ।। ५.३८.५।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय