Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 38.40

स कुरुष्व महोत्साहः कृपां मयि नरर्षभ ।
त्वया नाथवती नाथ ह्यनाथा इव दृश्यते ।। ५.३८.४०।।।।

पूरा अध्याय