ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 3838.20वाल्मीकि रामायण 38.20बाष्पपूर्णमुखी मन्दं चक्षुषी परिमार्जती । लक्षिता ऽहं त्वया नाथ वायसेन प्रकोपिता ।। ५.३८.२०।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय