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वाल्मीकि रामायण 37.59

भर्तृमक्तिं पुरस्कृत्य रामादन्यस्य वानर ।
न स्पृशामि शरीरं तु पुंसो वाररपुङ्गवः ।। ५.३७.६०।।।।

पूरा अध्याय